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इमरान खान पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ी शहबाज की मुश्किल, सरकार की याचिका खारिज; अब क्या होगा?

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Aug 20, 2026 09:52 pm IST,  Updated : Aug 20, 2026 10:38 pm IST

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को निजी अस्पताल में इलाज कराने संबंधी आदेश की समीक्षा के लिए शहबाज शरीफ सरकार की याचिका तकनीकी खामियों के चलते खारिज कर दी। 48 घंटे की समयसीमा बीतने के बावजूद इमरान अस्पताल नहीं पहुंचे हैं। PTI अब सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना याचिका दाखिल करने की तैयारी में है।

Imran Khan Supreme Court Order, Shehbaz Sharif Government Crisis- India TV Hindi
इमरान खान के इलाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शहबाज शरीफ की सरकार बचने के रास्ते देख रही है। Image Source : INDIA TV

Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने शहबाज सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज की, अब दोबारा याचिका दाखिल होगी।
  • 48 घंटे की समयसीमा खत्म, फिर भी इमरान खान को अस्पताल नहीं भेजा गया।
  • PTI शुक्रवार को सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का केस दाखिल करेगी।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत और उन्हें जेल से बाहर इलाज के लिए भेजने का मुद्दा अब बड़ा सियासी विवाद बन गया है। शहबाज शरीफ सरकार और पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के बीच इस मामले में टकराव बढ़ता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को निजी अस्पताल में इलाज कराने की राहत दी थी, लेकिन सरकार ने इस आदेश पर अमल करने के बजाय उसे चुनौती देने की कोशिश की। हालांकि अपनी इस कोशिश के चक्कर में शहबाज शरीफ की सरकार की जमकर किरकिरी हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को 48 घंटे के भीतर शिफा हॉस्पिटल में भर्ती कराने का आदेश दिया था। इस आदेश की समय सीमा खत्म होने के बीच इस्लामाबाद के चीफ कमिश्नर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की गई। सरकार चाहती थी कि कोर्ट अपने पहले के आदेश की समीक्षा करे और इमरान खान को निजी अस्पताल में इलाज कराने की इजाजत वाले फैसले को बदले। सरकार का कहना था कि इमरान का इलाज जेल के अंदर या किसी सरकारी अस्पताल में कराया जाना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया। कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में तकनीकी गलतियां होने की वजह से उसे वापस कर दिया।

सरकार बोली, 'अंतिम फैसला आने के बाद लेंगे फैसला'

अब सरकार का कहना है कि याचिका में मौजूद गलतियों को ठीक करके दोबारा रिव्यू पिटीशन दाखिल की जाएगी। शहबाज शरीफ सरकार का कहना है कि आज दाखिल की गई याचिका में कुछ तकनीकी समस्याएं थीं। सरकार इन गलतियों को ठीक करके फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। सरकार के मुताबिक, जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अंतिम फैसला देगा, उसके बाद ही इमरान खान को अस्पताल भेजने को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश जेल के नियमों के अनुरूप नहीं है।

सरकार का कहना है कि अगर इमरान खान को निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जाती है, तो दूसरे कैदी भी इसी तरह की मांग कर सकते हैं। इससे जेल में कैदियों के बीच भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है और एक गलत मिसाल कायम हो सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने इमरान खान के इलाज के लिए 16 सितंबर तक निजी अस्पताल की व्यवस्था का आदेश दिया है।

48 घंटे की मियाद खत्म, जेल से नहीं निकले इमरान

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुप्रीम कोर्ट के 48 घंटे के आदेश की मियाद खत्म हो चुकी है, लेकिन इमरान खान को अभी तक जेल से अस्पताल नहीं भेजा गया है। इमरान खान के वकील सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी अदियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट को सौंप चुके हैं। इसके बावजूद आदेश पर अमल नहीं हुआ है। यही वजह है कि अब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI सरकार पर अदालत के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है।

PTI सरकार पर करेगी 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट' का केस

PTI नेता जुनैद अकबर ने कहा है कि पार्टी के नेता शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट यानी अदालत की अवमानना का केस दाखिल करेंगे। जुनैद अकबर का आरोप है कि सरकार इमरान खान से डरती है। उनका कहना है कि अगर इमरान खान जेल से बाहर आते हैं तो शहबाज शरीफ की सरकार के सामने बड़ा राजनीतिक खतरा खड़ा हो सकता है। जुनैद अकबर ने कहा कि इमरान खान की लोकप्रियता पाकिस्तान की जनता के बीच अब भी मजबूत है और सरकार इसी वजह से उन्हें जेल से बाहर नहीं आने देना चाहती। उनके मुताबिक, सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू न करने के लिए अलग-अलग बहाने तलाश रही है।

इमरान की सेहत से ज्यादा सियासत की चिंता?

इमरान खान की सेहत अब पाकिस्तान की जनता के लिए भी बड़ा मुद्दा बन चुकी है। लेकिन इस पूरे विवाद में PTI लगातार आरोप लगा रही है कि सरकार को इमरान खान की सेहत से ज्यादा उनकी राजनीतिक ताकत की चिंता है। PTI का आरोप है कि शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर नहीं चाहते कि इमरान खान किसी भी कीमत पर जेल से बाहर आएं। पार्टी का कहना है कि इमरान खान की लोकप्रियता सरकार और सत्ता प्रतिष्ठान के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। PTI समर्थकों का दावा है कि अगर इमरान खान जेल से बाहर आते हैं तो वह सरकार के सामने बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर सकते हैं, इसीलिए सरकार सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मान रही है।

आखिर इस मामले में अब आगे क्या होगा?

फिलहाल गेंद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। शहबाज शरीफ सरकार तकनीकी गलतियां सुधारकर नई रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की तैयारी में है। दूसरी तरफ PTI सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दायर करने जा रही है। ऐसे में इमरान खान का अस्पताल जाना अब सिर्फ स्वास्थ्य का मामला नहीं रह गया है। यह पाकिस्तान की राजनीति, सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच अधिकारों की खींचतान का बड़ा मुद्दा बन गया है। सबकी नजर अब सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर है। अगर कोर्ट अपने पहले के आदेश पर कायम रहता है, तो शहबाज शरीफ सरकार पर इमरान खान को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भेजने का दबाव और बढ़ सकता है।

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